2023-24 में जेवर एयरपोर्ट से सफर करेंगे लोग, ज्यूरिख एयरपोर्ट को मिला काम, जानें सबकुछ

 


2023-24 में जेवर एयरपोर्ट से सफर करेंगे लोग, ज्यूरिख एयरपोर्ट को मिला काम, जानें सबकुछ


जेवर एयरपोर्ट के निर्माण के लिए ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी कंपनी का चयन तय समय में होने से 2023-24 में उड़ान शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है। यहां से सफर एक रनवे से शुरू होगा और बाद में जब यात्री बढ़ जाएंगे, तब दूसरा रनवे बनेगा।
 

यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने बताया कि यात्रियों की संख्या और निर्माण कार्य के हिसाब से एयरपोर्ट के निर्माण को चार हिस्सों में बांटा गया है। पहला चरण 2023-24 में पूरा होगा।

पहले साल करीब 1.20 करोड़ यात्रियों के सफर करने का आकलन है। इसे देखते हुए एक रनवे से सफर शुरू कर दिया जाएगा। इसका दूसरा हिस्सा 2031-32, तीसरा हिस्सा 2036-37 और चौथा हिस्सा 2040-50 के बीच बनेगा।

सीईओ ने बताया कि 2031-32 में यात्रियों की संख्या लगभग तीन करोड़ सालाना होगी। इसी तरह 2036-37 में यात्रियों की संख्या पांच करोड़ और 2040 से 50 के बीच सात करोड़ यात्रियों के सफर करने का आकलन है।

इस एयरपोर्ट को बनाने के लिए जिस कंपनी का चयन होगा वह जरूरत के हिसाब से दो रनवे और टर्मिनल का निर्माण करेगी। उन्होंने बताया कि सर्वे रिपोर्ट में दो रनवे से 2050 तक की जरूरत को पूरा होने का आकलन है। अगर इस दौरान यात्रियों की संख्या आकलन से अधिक होती है तो तीसरे और चौथे रनवे का निर्माण किया जाएगा।


कार्गो व एमआरओ से फलेंगे उद्योग-व्यवसाय



जेवर में एयरपोर्ट में बनने से इस इलाके में ही नहीं, बल्कि आसपास के 40 जिलों की सूरत बदलेगी। एयरपोर्ट के साथ-साथ यहां विमानों के मेंटेनेंस रिपेयर एंड ओवरहालिंग (एमआरओ) और कार्गो हब बनेगा।

यहां पर लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा। नियाल के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह का कहना है कि इस एयरपोर्ट के बनने से जेवर ही नहीं, आसपास के 40 जिलों की सूरत बदलेगी। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तो सीधे लोगों को एयरपोर्ट में नौकरियां भी मिलेंगी।

एयरपोर्ट के अलावा यहां कई और गतिविधियां भी होंगी। अभी तक देश में केवल हैदराबाद व नागपुर में विमानों के मेंटेनेंस का काम होता है। वह भी बड़े छोटे स्तर पर। बाकी काम विदेशों में कराना पड़ता है। इस एयरपोर्ट में मेंटेनेंस हब भी विकसित किया जाएगा।

नोएडा एयरपोर्ट से सफर के साथ कार्गो सेवा शुरू होगी। दिल्ली एयरपोर्ट से एनसीआर और आसपास के शहरों में बनने वाले औद्योगिक उत्पाद यूरोप, मध्य पूर्व एशिया, दक्षिण एशिया, पूर्व एशिया, चीन और अमेरिका को भेजे जाते हैं।

एनसीआर में गौतमबुद्ध नगर व गाजियाबाद से 51 फीसदी उत्पाद इन देशों को जाते हैं। टीईएफआर रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में बढ़कर 556 फीसदी हो जाएगा।




15 किलोमीटर के दायरे में होगी सिटी साइट डेवलपमेंट



यमुना प्राधिकरण एयरपोर्ट के 15 किलोमीटर के क्षेत्र में 1500 हेक्टेयर एक शहर बसाएगा। इसके लिए एक कंपनी अध्ययन कर रही है। यह शहर यूरोपीय शहरों की तरह बसाया जाएगा। इसे सिटी साइट डेवलपमेंट नाम दिया गया है। इसमें ऑफिस, बाजार और घर सब कुछ रहेंगे, ताकि लोग वहीं पर नौकरी करें और वहीं पर खरीदारी। इससे क्लीन और ग्रीन सिटी का दर्जा दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री रख सकते हैं नींव
देश के सबसे बड़े एयरपोर्ट की नींव रखने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आ सकते हैं। स्विस कंपनी ज्यूरिख को निर्माण करने का पत्र सौंपने में एक माह लगेगा। इसके बाद कंपनी अपनी तैयारी के साथ दो माह में काम शुरू करेगी। इस हिसाब से फरवरी में इसकी नींव रखी जा सकती है, जिसमें प्रधानमंत्री के आने के कयास लगाए जा रहे हैं।

कब क्या हुआ


6 जुलाई 2017 : हवाई अड्डे के लिए निर्माण साइट की अनुमति मिली।
5 अक्टूबर 2017 : गृह मंत्रालय ने एनओसी दी।
29 दिसंबर 2017 : यमुना प्राधिकरण ने सलाहकार कंपनी का चयन किया।
11 जनवरी 2018- रक्षा मंत्रालय ने एनओसी दी।
15 अप्रैल 2018 : सलाहकार कंपनी ने टीईएफआर सौंप दी।
23 अप्रैल 2018 : नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी।
09 मई 2018 - नागर विमानन मंत्रालय ने इन प्रिंसिपल अप्रूवल दिया।
30 मई 2019 - एयरपोर्ट के लिए ग्लोबल टेंडर निकाले गए।
06 नवंबर 2019- एयरपोर्ट की तकनीकी निविदा खोली गई।
29 नवंबर 2019- नोएडा एयरपोर्ट की वित्तीय निविदा खोली गई।

छह गांवों की 1334 हेक्टेयर जमीन पर बनेगा एयरपोर्ट


नोएडा एयरपोर्ट के पहले चरण में 1334 हेक्टेयर जमीन लगेगी। इसमें छह गांवों (दयानतपुर, रोही, पारोही, किशोरपुर, रन्हेरा व बनवारीवास) के किसानों की 1239.141 हेक्टेयर जमीन है। बाकी जमीन सरकारी है। इसमें से 998.1307 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा लिया जा चुका है। जबकि कुल 1028.55 हेक्टेयर जमीन का मुआवजा बांटा जा चुका है। अब तक 3167 करोड़ रुपये मुआवजा बांटा गया है।